Followers

Wednesday, December 25, 2013

अनोखा विमान

आज भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्मदिवस है। अटल जी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को ग्वालियर, मध्य प्रदेश में हुआ था। अटल जी सफल राजनीतिज्ञ के साथ साथ एक कवि भी हैं। "मेरी इक्यावन कविताएँ" उनका प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है।
आज उनके जन्मदिन पर मैं उनकी एक कथा कहानी आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे अटल जी ने भारत के प्रधानमंत्री रहते हुए बच्चों कि प्रसिद्ध बाल पत्रिका "नंदन" में प्रकाशित करने के लिए श्रीमदभागवत से लिया था ये कहानी उन्होंने अपनी भाषा में "अनोखा विमान" नाम से लिखी थी। ये कहानी इसी नाम से नंदन के मई, 1999 के संस्करण में प्रकाशित हुई थी।

अनोखा विमान


शाल्व शिशुपाल का मित्र था। शिशुपाल को श्रीकृष्ण ने मारा था। इस पर शाल्व ने प्रण किया - "मैं अपने मित्र का बदला लूंगा।"

वर पाने के लिए शाल्व ने पशुपतिनाथ की आराधना शुरू की। भोजन और जल त्याग दिया। हर समय ध्यान करता रहता। शाल्व के संकल्प से शिवजी प्रसन्न हुए। उन्होंने शाल्व को दर्शन दिए।

शाल्व ने इच्छा जताई - "मुझे एक अनूठा विमान दीजिए। देवता, असुर, मनुष्य - कोई भी उसे तोड़ न सके। जहाँ इच्छा हो, वह चला जाए।"

शिव ने 'तथास्तु' कह दिया। मय दानव ने एक विमान बनाया और शाल्व को दे दिया। विमान दूसरों को दिखाई नहीं देता था। बस, शाल्व ने विमान में बैठकर द्वारिका पर आक्रमण कर दिया।

शाल्व की सेना ने चारों ओर से नगर को घेर लिया। शाल्व आकाश से अस्त्र-शस्त्र बरसाने लगा। तेज़ हवा चलने लगी। ऊपर से बड़ी-बड़ी चट्टानें गिरने लगीं। द्वारिका के लोग घबरा गए। तब प्रद्धुमन रथ पर सवार होकर आए। उनके साथ सेना भी थी। शाल्व और प्रद्धुमन के बीच भयंकर युद्ध हुआ। शाल्व विमान में बैठकर युद्ध कर रहा था।

श्रीकृष्ण उन दिनों युधिष्ठिर से मिलने इंद्रप्रस्थ गए हुए थे। उन्हें शाल्व के आक्रमण की सूचना मिली तो वे द्वारिका लौट आये और शाल्व से लड़ने जा पहुँचे। शाल्व युद्ध में कृष्ण के सामने नहीं टिक सकता था। उसने युद्धभूमि में माया से एक आदमी तैयार किया। उसकी आकृति श्रीकृष्ण के पिता वासुदेव जैसी थी। उसने कहा - "श्रीकृष्ण, तुम्हारे पिता मेरे कब्जे में हैं।" फिर उसने उस माया - मानव को मार डाला।

श्रीकृष्ण इस मायावी रहस्य को समझ गए। उन्होंने गदा के प्रहार से शाल्व के विमान को तोड़ डाला। फिर अपने पैने बाणों से उसे घायल कर दिया। गदा के प्रहार से शाल्व का विमान समुद्र में गिर पड़ा। गिरते विमान से शाल्व धरती पर कूद पड़ा। उसके हाथ में गदा थी। वह गदा को घुमाता हुआ श्रीकृष्ण की ओर दौड़ा, तो उन्होंने सुदर्शन चक्र से उसका वध कर दिया।

(श्रीमदभागवत)
लेखक : अटल बिहारी वाजपेयी
 साभार : "नंदन" मई, 1999

8 comments:


  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 26-12-2013 को चर्चा मंच की चर्चा - 1473 ( वाह रे हिन्दुस्तानियों ) पर दिया गया है
    कृपया पधारें
    आभार 

    ReplyDelete
    Replies
    1. चर्चा में शामिल करने के लिए सादर धन्यवाद।।

      Delete
  2. आपकी इस ब्लॉग-प्रस्तुति को हिंदी ब्लॉगजगत की सर्वश्रेष्ठ कड़ियाँ (25 दिसंबर, 2013) में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,,सादर …. आभार।।

    कृपया "ब्लॉग - चिठ्ठा" के फेसबुक पेज को भी लाइक करें :- ब्लॉग - चिठ्ठा

    ReplyDelete
  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (26-12-13) को चर्चा - 1473 ( वाह रे हिन्दुस्तानियों ) में "मयंक का कोना" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  4. श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाए ,...!

    Recent post -: सूनापन कितना खलता है.

    ReplyDelete
  5. श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को हार्दिक शुभकामना

    ReplyDelete
  6. आप सबका सादर धन्यवाद।।

    ReplyDelete

आपकी अमूल्य टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।
प्रचार के लेख पसंद आने पर कृपया प्रचार ब्लॉग के समर्थक (Follower) बने। धन्यवाद। सादर।।